Sanjhi -- Pustak Samiksha : Atulya Khare

 

  • Pustak Samiksha : Atulya Khare

  • समीक्षित पुस्तक : सांझी

  • द्वारा : शिवांगी पुरोहित

  • विधा : उपन्यास

  • Lion’s Publication द्वारा प्रकाशित

  • प्रथम संस्करण  : 2024

  • मूल्य : 160.00

  • समीक्षा क्रमांक : 249

                                                 

Sanjhi By shivangi Purohit main cover

                     

प्रकाशन का दायित्व संभाल रही बहुमुखी प्रतिभा की धनी ,प्रख्यात लेखिका विदुषी शिवांगी पुरोहित का नारी विमर्श आधारित यह उपन्यास "सांझी" जहां एक ओर साफ-सुथरी प्रेमकथा प्रस्तुत करता है, तो वहीं दूसरी ओर निम्न-मध्यमवर्गीय पारिवारिक परिस्थितियों और विशेष तौर पर परिवार में मुखिया द्वारा मदिरा सेवन के प्रभाव को उनके बच्चों पर पड़ने वाले प्रभाव को सामने लाता है। शिवांगी जी के इसके पूर्व प्रस्तुत कृतियों यथा कटिंग चाय , जेल डायरी और अभ्युत्थानम को प्रबुद्द पाठक वर्ग से उत्तम प्रतिसाद प्राप्त हुआ ।

Sanjhi By shivangi Purohit, Back cover

कहानी एक युवती सांझी की है जो एक एक निम्न
-मध्यमवर्गीय परिवार से तालुक रखती है, जिसका बचपन पिता की शराब की आदत और माता-पिता के बिगड़ते संबंधों की छाया में बीतता है। माता पिता का तलाक बच्चों के लिए एक अभिशाप बन कर आता है । वहीं सांझी के लिए एक मात्र आशा या खुशी का जरिया उसका बचपन कपयर है जिस से वह अपनी मुश्किलें और घर परिवार के दर्द तकलीफें साझा कर लेती है।

                                                              

Sanjhi By shivangi Purohit,

सांझी के चरित्र के माध्यम से नारी की सहनशीलता, उसकी चाहत, मुखरता और परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया है।

माता-पिता के तलाक के बाद बच्चों की कस्टडी पिता को मिलना और फिर पिता का एक स्वार्थी एवं चालाक महिला से विवाह कर उसे घर में ले आना, सांझी के जीवन को और कठिन बना देता है।


                                                     


कथा नायक की माँ और बहन जैसे पात्र नारी के दूसरे रूप को सामने लाते हैं, जिससे कथा में स्त्री-चरित्रों की विविधता दिखाई देती है।

सौतेली माँ के दुर्व्यवहार के संग आई अनेकों परेशानियों के संग उसे एक गंभीर यौन उत्पीड़न के प्रयास का सामना भी करना पड़ता है। तब परिस्थितियों से थककर सांझी घर छोड़ने का फैसला करती है और घर से निकलकर अपने बचपन के प्यार से प्रेम विवाह का निर्णय लेती है , जहां उसे एक सपनों की दुनियाँ नजर आती है जिसमें सिर्फ औ सिर्फ खुशियां ही होंगी किन्तु प्रेम-विवाह के बाद भी उसके सपनों पर तुषारपात होता है और दुखों का अंत नहीं होता सिर्फ प्रकार बदल जाता है साथ ही मिलती है एक कैद ।

                                                        


चूंकि बेटे ने प्रेम विवाह किया हुआ है अतः सांझी को घर में बंद कर रखा जाता है ताकि समज में किसी को भी विवाह की जानकारी न हो । बस उसका पट्टी ही ससुराल में उसका अपना है बाकी किसी को भी उस से कोई मतलब नहीं है व उन सबके दिलों में उसके लिए एक बैर भाव बसता है।

समय बीत जाने के बावजूद ससुराल में उसे अपेक्षित अपनापन नहीं मिलता । वहाँ का असहनीय व्यवहार उसके जीवन की एक और कठिन परीक्षा बन जाता है। मात्र पति का प्यार और उसके अतिरिक्त एक कैदी से भी गयी गुजरी ज़िंदगी जीने को मजबूर वह आत्महत्या तक का प्रयास कर बैठती है। उसके पति का दूसरा विवाह करवाने का प्रयास भी होता है एवं हर संभव मानसिक एवं शारीरिक प्रताड़ना का सामना उसे करना पड़ता है।

पति की असमय मृत्यु के बाद सांझी को ससुराल से भी बाहर कर दिया जाता है जिसके लिए भी उसे ही जिम्मेवार समझा जाता है। वह वापस अपनी माँ के घर लौट आती है और पति की स्मृतियों के सहारे जीवन आगे बढ़ाती है।

                                                             


कथानक में सरल प्रवाह है तथा घटनाक्रम पाठक को बाँधे रखता है वहीं सीमित पात्रों के कारण कहानी अनावश्यक रूप से उलझती नहीं है। न ही पात्र अन्य पात्र पर दबाव बनाते हैं


भाषा सामान्य, सहज और वाक्य-विन्यास सरल है। कुछ स्थानों पर संवाद अपेक्षाकृत विस्तृत अवश्य लगते हैं, फिर भी कथानक बोझिल नहीं होता।


एक साफ सुथरी पारिवारिक कहानी है जहां एक ओर प्रेम की पराकाष्ठा है तो दूसरी ओर रिश्तों की कड़वाहट का भी पुरजोर प्रभाव देखने में आता है।


                            

                                                                                                                                                                                        
                                                                                 अतुल्य खरे


               

                                                                                                                                                   fb atulyakhare kayasth       insta atulyasamiksha    blogger        x 
     


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